मत करो बर्बाद, बंद हो शराब!
नशामुक्त समाज बनाने को लेकर केंद्र व राज्य सरकार चाहे जो भी
'स्लोगन' दें, परंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अगर हम बात
सिर्फ बेगूसराय की ही करें, तो गांव-टोले में भी कुकुरमुत्ते की तरह
वैध-अवैध शराब की दुकानें गली-गली में खुल चुकीं है। गांवों में शराब की
दुकानें खुलने से जहां एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो रही हैं, वहीं दिन प्रतिदिन
आपराधिक घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। गांव-गांव में खुली लाइसेंसी,
गैर लाइसेंसी शराब की दुकानें व अवैध दारू भट्टी के कारण अब खूनी खेल भी
खेले जाने लगे हैं। जिसका एक ज्वलंत उदाहरण है- बीते 24 फरवरी की रात्रि
सदर प्रखंड स्थित बहदरपुर पंचायत में एक लाइसेंसी शराब दुकान पर हुई संजय
साह और राजेश पोद्दार की गोली मारकर हत्या। उक्त शराब दुकान पर सशस्त्र
अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दो लोगों को मौत का घाट उतार दिया। इस
घटना के बाद से बहदरपुर समेत आसपास के गांवों में आक्रोश है। ग्रामीण अब
गांवों में खुली शराब दुकानों को बंद कराने की मांग पर उतर गए हैं। कुसमहौत
के राजेश चौधरी, जगदीशपुर के राकेश कुमार, शुभम कुमार आदि का कहना है कि
पहले शराब दुकानों पर गाली-गलौज होना आम था, परंतु अब तो हत्या भी होने लगी
है। ऐसे में इन दुकानों को गांवों से हटाया जाए। वहीं, कई जनप्रतिनिधि भी
इससे सहमत हैं। दूसरी ओर शराबबंदी को लेकर जिले के विभिन्न इलाकों में
मुहिम भी शुरू हो चुकी हैं।
बताते चलें कि बीते 5 फरवरी से तेघड़ा प्रखंड स्थित रातगांव में महादलित
महिलाओं ने नशामुक्त समाज बनाने के लिए अभियान छेड़ दिया है। इसी तरह बीते
दिनों बरौनी प्रखंड के बीहट में अवैध शराब बिक्री पर रोक लगाने को लेकर
ग्रामीणों ने मोर्चा खोला। ग्रामीणों को सफलता भी मिल रही है।
इधर, एसपी क्षत्रनील सिंह ने कहा कि जिले के सभी थानाध्यक्षों को शराब
दुकानों पर कड़ी निगाह रखने के निर्देश दिए गए हैं। शराब पीकर नौटंकी करने
वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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